योग से सफलता के शिखर तक

       योग से सफलता के शिखर तक                                                                                                                       

योग से सफलता के शिखर तक
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                                       योग करने से क्या फायदे हैं?                                                                                                दोस्तों आज हम योग से जुड़े हुए कुछ महत्वपूर्ण विषय पर बात करेंगे ,योग शब्द सुनते ही आपके दिमाग में जरूर आता होगा कि लोग तो इसे योगा कह कर पुकारते लेकिन इसके पुकारने को लेकर कुछ भ्रांतियां लोगों के मन में मौजूद हैं उनकोे पहले दूर करना चाहूंगा सबसे पहले बताना चाहूंगा कि योग शब्द आया कहां से, योग का शाब्दिक अर्थ क्या है? योग मतलब हिंदी भाषा के अनुसार जुड़ना होता है दो बिंदुओं, विचारों ,आकारों, परमाणुओ  का वास्तविक स्वरूप में आपस में जुड़ने को योग कहा जाता है यहां पर योग का आशय है मन बुद्धि का आपस में जुड़कर शरीर को संतुलित स्वरूप प्रदान करना    यो गष्य  चित्त वृत्ति निरोध: अर्थात चित्त  यानी बुद्धि के अंदर मौजूद तमाम वृत्तियों व  छवियों का निरोगधाम करना योग से बुद्धि के अंदर मौजूद तमाम प्रकार के NEGATIVE विचारों चित्रों को बाहर निकालना/ आप सभी इस बात से अच्छी तरह परिचित है कि मन और बुद्धि आपस में जुड़े होने के बावजूद भी इनके कार्य अलग-अलग है                                 

योग से सफलता के शिखर तक

      मन की शक्ति                                                                                                                    बुद्धि यानि अवचेतन मन ,  हमारे अंदर मौजूद तमाम प्रकार के विचार एवं भावनाओं का स्टोर हाउस है इसी बुद्धि के अंदर ही हमारे विचार भावनाएं ,आदतें व लिखे -पढ़े व अनुभव किए गए समस्त यादें मौजूद होती है l दूसरी तरफ मन का कार्य हमारे स्टोर हाउस यानी बुद्धि की रक्षा करना है जो सुरक्षा गार्ड की तरह रक्षा करता है उन तमाम विचार भावनाओ आदतों को सुरक्षा प्रदान करता है कोई भी विचार एवं भावनाएं बुद्धि के अंदर तभी प्रविष्ट कर पाती हैं जब मन अंदर जाने की इजाजत देता है अगर मन ना चाहे तो वह बातें अंदर नहीं जा सकती है l सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि मन और बुद्धि का आपसी संतुलन शब्द से तात्पर्य मन और बुद्धि का आपस में संतुलन प्रदान करना जैसा कि हम सभी इस बात से पूर्व परिचित है कि मन और बुद्धि ही हमारे संपूर्ण शरीर को operate  करते हैं शरीर की सारी क्रिया प्रतिक्रिया मन और बुद्धि के द्वारा  co mmand  किए जाते हैं जो कमांड करता हो उसे Commander  कहते हैं हमारे शरीर का Commander  मन और बुद्धि को माना जाता है l शरीर मन के द्वारा कैसे कमांड किया जाता है मन को विज्ञान की भाषा में चेतन मन कहा जाता है हम सुबह जागने से लेकर सोने तक जो कार्य करते हैं चेतन मन के द्वारा ही Control  किए जाते हैं इसके पास आंशिक अधिकार ही होते हैं जैसे सोचना, विचार ना तर्क – वितर्क ,निर्णय लेना इत्यादि खाने पीने के बारे में निर्णय लेना मन का ही कार्य है मन के पास किसी भी इंफॉर्मेशन को रखने की क्षमता नहीं होती है मनअपने स्टोर हाउस में मौजूद समस्त सूचनाओं से जानकारी इसके बारे में हासिल करता है की खाना है खाना पीना है या नहीं ,यह निर्णय मन के द्वारा ही  लिया जाता है ं मन की चंचल गतिविधियां इंसान को अन्य जीवो से अलग करती है सोचने समझने की अपनी अद्भुत क्षमता के बल पर इंसान इस धरती पर राज करता है यही सोचने समझने की अलग क्षमता ही इंसान को महामानव का दर्जा दिलाती है जो अपनी विकसित  सभ्यता और संस्कृति के लिए मशहूर है अच्छी -बुरी, सभी तारा की आदतें मन के द्वारा निर्मित की जाति है lसमस्त आदतों का सूत्रधार मन को ठहराया जा सकता है   i                                     

                                                                                                                 इंसान की सफलता का राज                                                                                                               इस धरती पर इंसान की सफलता का राज उसके मन के अंदर मौजूद सोचने और समझने की शक्तियों की वजह से है यही विशेषताएं धरती पर मौजूद करोड़ों़ जीवो से अलग बनाती है बल्कि एक ऐसा स्वरूप प्रदान करती है जो धरती पर मौजूद किसी अन्य प्राणियों में नहीं पाई जाती है इंसानी सभ्यता की कहानी यहीं से शुरू होती है और मन के पास ही आकर खत्म भी हो जाती है इंसान प्रत्येक क्रिया और प्रतिक्रिया अपने बुद्धि में मौजूद इंफॉर्मेशन के अनुसार ही करता है उसके सारे निर्णय इंफॉर्मेशन के अनुरूप ही लिए जाते हैं जापानी और भारतीय बच्चों में क्या अंतर है?  ?धरती के किसी भी हिस्से में रहने वाले इंसानो के बनावट में किसी प्रकार की विभिन्नता नहीं पाई जाती हैं परंतु क्या वजह है कि धरती के एक हिस्से में गरीबी और भुखमरी अपना शैतानी पांव पसारे खड़ी हैं तो दूसरी तरफ सुख समृद्धि की अट्टालिका ए खड़ी उनको मुंह चिढ़ा रही हैं यहां पर कोई भूख से मर रहा है तो कोई खा खा कर मर रहा है इन सब सवालों का जवाब भारतीय जापानी बच्चों में अंतर को जानकर हासिल किया जा सकता है एक तरफ जापानी बच्चों को 8 वर्ष की उम्र तक ना तो किसी प्रकार की परीक्षा से गुजरना पड़ता है ना ही किसी कठिन होमवर्क से, दूसरी तरफ भारतीय बच्चों की दशा, जब से बोलने और समझने लगते हैं इन्हें होमवर्क व पीठ पर किताबों का बोझ लाद  दिया जाता है, 8 साल के होने तक न जाने कितनी परीक्षा और होमवर्क से गुजरना पड़ता हैl हर भारती मां बाप आसानी से इस बात को समझ सकते हैं पीछे छूटने वाला हर दिन इतिहास में दर्ज हो जाता है और इतिहास की भूली बिसरी यादों को ही शिक्षा का मूल स्वरूप मान लिया गया है जो बच्चा इन भूली बिसरी यादों को बेहतर ढंग से रट कर परीक्षा में  लिख पाता है उसेे विद्वान घोषित किया जाता है सरकार उसे ही  प्रशासनिक कार्य के लिए उपयुक्त मानती है जो ना लिख पाए विद्वानों के श्रेणी में नहीं आ पाता है उसे समाज व सरकार असफल  व्यक्ति मान लेती है जिसे समाज में उतना सम्मान नहीं मिल पाता है सफलता का ताज भारत में वही व्यक्ति पहनता है जो यादों को रटकर बेहतर ढंग से परीक्षाओं में लिख सके i                                                             

                                        जापानी बच्चों की बात करते हैं जिन्हें उम्र के आठवीं कक्षा   तक किसी भी प्रकार की परीक्षा से दूर रखा जाता है उन्हें किसी भी प्रकार का होमवर्क नहीं कराया जाता उन्हें बचपन से खेलने कूदने की आजादी दी जाती है खेल कूद  के द्वारा ही लिखना पढ़ना बोलना सिखाया जाता है  भारत के बच्चों को डांट डपट डरा धमकाकर कराया जाता हैवही जापानी बच्चो को  खेल खेल में आसानी से सिखा दिया जाता है उनके पाठ्यक्रम में हजारों प्रकार के खेल शामिल किए गए हैं जो इनके मानसिक कौशल को बढ़ाने में मदद करते हैं योग ध्यान निमित्त कक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किए गए हैं जैसा कि आप जानते हैं जापानी लोग अपनी मेहनत और लगन के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है अपने मेहनत व कौशल के दम पर जापानी दुनिया की एक बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है गरीबी व चोरी खोजने से भी नहीं मिलते हैं इसलिए जापान को उगता हुआ सूरज कहा जाता है दूसरी तरफ जापान में प्राकृतिक आपदा भी कम नहीं आती है ,भूकंप साल दर साल आते ही रहते हैं सन 1945 में     द्वी  तीय विश्व युद्ध के समय जापान के दो प्रसिद्ध शहर हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिरा दिया गया था लेकिन आज वह शहर जापान की तरक्की की दास्तां सुना रहे हैं मन और बुद्धि का आपस में क्या संतुलन होना चाहिए यह बात जापानी लोग अच्छी तरह जानते हैं इसलिए बचपन से ही बच्चों के मानसिक क्षमता को विकसित करने का प्रयास करते हैं विकसित दिमाग वाला देश ही विकास के पथ पर सरपत दौड़ सकता हैl                                                                                                                                                                                 

 भारतीय प्राचीन शिक्षा प्रणाली                                                                                       भारतीय प्राचीन शिक्षा प्रणाली कभी विश्व की सबसे विकसित गुरुकुल शिक्षा प्रणाली थी तभी तो एक समय भारत को विश्व गुरु का दर्जा दिया गया था भारतीय गुरुकुल प्रणाली में मुख्य खास बात यही था कि उनका पाठ्यक्रम मन और बुद्धि के संतुलन पर आधारित था उनकी गुरुकुल शिक्षा का मूल मकसद था मन और बुद्धि का आपसी संतुलन स्थापित करना यानी मन और बुद्धि को आपस में जोड़ना जो योग की क्रिया कहलाता था अच्छे व्यक्तित्व गुणवान लोगों को पैदा करने में मदद करते हैं इन्हीं गुरुकुलो  से निकले लोग प्रशासनिक कार्यों के लिए चुने जाते थे इन पर ही इनके राज्यों का भविष्य टिका होता था l मन क्या है? मन शरीर का भौतिक अंग ना होते हुए भी सबसे महत्वपूर्ण अंगों में माना जाता है ऊर्जा का एक रूप है शरीर के कण-कण में मौजूद है साथ साथ पूरे शरीर की सुरक्षा का कार्य करता हैl बार-बार इस्तेमाल होने वाली आदतें ही इंसान का स्वभाव बन जाती है इसलिए इंसान को आदतों का गुलाम कहा जाता है अच्छी आदतें विकसित करने के लिए पसीना बहाना पड़ता है क्योंकि एक अच्छी आदत विकसित करना है तो दूसरी तरफ बुरी आदत से पीछा छुड़ाना है जैसे मान  लेते हैं आप सुबह उठने की आदत विकसित करना चाहते हैं उसके लिए क्या करना होगा सर्वप्रथम उस सोने की आदत को खत्म करना पड़ेगा सोने की आदत खत्म करोगे तभी अच्छी आदत विकसित होगीगंदी  छुड़ाना इतना आसान कार्य नहीं होता है आप चाहकर भी सुबह सोने की आदत नहीं छोड़ पाते हैं नई आदत पकड़ने के लिए पुरानी आदत को छोड़ने के लिए तैयार रहना पड़ेगा मन उन्ही आदतों  को पकड़ता है जिसमें उसको मजा आता है फूलों की खूबसूरती को आंखों द्वारा  देख कर, सुगंध को महसूस कर मन मयूर की तरह नाचने लगता है लेकिन एकाएक सामने से कचरे से भरी गाड़ी से उठ रहे दुर्गंध नाक मुंह सिकुड़ने को मजबूर कर देते हैं यह क्या है? मन के द्वारा एक ही समय अंतराल में किए गए दो तरह के एहसास है तो कहने का आशय यह है कि जो कार्य मन को अच्छा लगता है वह कार्य बार बार करने के लिए आपको मजबूर करता है जो कार्य अच्छा नहीं लगता, बोरिंग लगता है उस कार्य की तरफ मन देखना भी नहीं चाहता वहां से तुरंत भागने की फिराक में लगा रहता है                                                                                                               

                                                           भारतीय बच्चों को स्कूल की छुट्टी बहुत ही प्यारी लगती है बच्चों को छुट्टियां बेहद पसंद है पढ़ाई करना एक बोरिंग कार्य लगता है क्योंकि वही ब्लैक एंड व्हाइट बोर्ड पर लिखा शब्द वही होमवर्क वही रट्टा मार एग्जाम जिस कार्य को मन बिल्कुल करना नहीं चाहता है अवकाश होने का मतलब है अधिकांश बच्चों के लिए बोरिंग कार्य से बचने का दिन, तो दूसरी तरफ जापानी बच्ची छुट्टी होने पर घर पर बोर हो जाते हैं उसका वजह आप जरूर समझ गए होगे क्योंकि स्कूल उन्हें खेलकूद के माध्यम से लिखना पढ़ना सिखाता है खेलते कूदते खिलखिलात बच्चे जापानी स्कूल की पहचान है तो दूसरी तरफ भारतीय स्कूलों में बच्चों के मुस्कुराने की वजह खोजते रह जाएंगे बच्चों के सामने वहीं मैडम का क्रूर चेहरा ,वहीं डॉट होमवर्क ना करके ले जाने पर मिलते सजा, परीक्षाओं में कम अंक लाने पर मम्मी पापा का चेहरा भी देखने लायक हो जाता है क्या क्या नहीं झेलना पड़ता है मासूम भारती बच्चों को? यह प्रकृति का प्राकृतिक सिद्धांत है जो खिल खिलाता  है वही खिलता है खिल खिलाते मुस्कुराते लोग प्रकृति व भगवान दोनों को बेहद पसंद है हंसते मुस्कुराते लोगों की इच्छाएं पलक झपकते ही पूरी होने लगती वहीं दूसरी तरफ बदहवास भागते फिरते लोग, किसी को ट्रेन पकड़ने की जल्दी तो किसी को  ऑफिस पहुंचने की जल्दी को सबके चेहरे पर को मंजिल तक पहुंचने की हड़बड़ी अधिकांश लोगों के चेहरे पर पढ़े जा सकते हैं तनाव टेंशन का शिकार पूरा का पूरा सिस्टम हो गया हैl                                                                                                                                   

 मन सर्वाधिक गति से चलने वाली एक अद्भुत ऊर्जा का नाम है जिस को काबू कर पाना इंसान के बस की बात नहीं है मन की चंचल गतिविधियां ऋषि-मुनियों व ज्ञानियों को भी पथभ्रष्ट कर देती है इसलिए मन की चंचलता को एक दिशा देना अति आवश्यक कार्य माना जाता है वैज्ञानिक कहते हैं मन में उठने वाले विचारों को रोकना संभव है क्योंकि जागने से लेकर सोने तक मन में लगभग 60,000 विचार आते ही आते है  आप भले ही आंखें बंद कर बैठ जाओ इंसान के बस में सिर्फ इतना है कि मन में उठने वाले विचारों को दिशा देने का कार्य कर   सकता है वह बुद्धि और विवेक के द्वारा इसलिए बुद्धि विवेक की आवश्यकता पड़ती है मन की सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि जो बातें उसे समझ में नहीं आती है उन्हें वह गलत मान बैठता है जो बातें समझ में आ रही है उसे सही मानने लगता है इंसान के मन को वश पाते समझ में आती है जिनके बारे में थोड़ा बहुत जानकारी रखता है अगर उसके बारे में जानकारी नहीं है तो वह व्यक्ति उसको गलत ही मान बैठता है क्योंकि उसको यह बातें समझ में नहीं आती हैl योग एक सैद्धांतिक शारीरिक क्रिया है जिसमें प्राणायाम के द्वारा शारीरिक गतिविधियों के द्वारा हम शरीर के सभी अंगो की सक्रियता को बढ़ाने का कार्य करते हैं जो सामान्य कामकाज की अवस्था में कर पाना असंभव है जी का आपसी संतुलन बनाने की अद्भुत क्षमता युग में छुपी हुई है योगेश्वर द्वारा मानव को दिया गया प्राकृतिक अद्भुत वरदान है योग  के साथ सामंजस्य बैठाना  ही सफलता की ओर बढ़ाया पहला कदम  है   प्रकृति और इंसान का चोली दामन का साथ है दिल की धड़कनें तभी तक सुनाई देती है जब तक फेफड़ों में प्राकृतिक प्राणवायु मौजूद होती है प्राणवायु ख़त्म तो उस व्यक्ति की धडकन थम चुकी होती है प्रकृति के साथ मन और बुद्धि का संतुलन स्थापित करना ही योग कहलाता है इंसान की सफलता का आविष्कार के पीछे की सारी कहानियां प्रकृति से शुरू होती है और प्रकृति में जाकर समाहित हो जाती है हवा , पानी, अग्नि ,आकाश,पृथ्वी  से बनी इस इंसानी शरीर की औकात बस इतनी सी है सोचकर कर्म कर सकता है परिणाम प्रकृति के पंजों में छुपा होता है इसी प्राकृतिक संतुलन को स्थापित करने का नाम योग दिया गया है, योग मानसिक क्रिया का भी नाम और शारीरिक क्रिया  का भी नाम योग है योग क्रिया  के द्वारा मन और बुद्धि का आपसी संतुलन बनाया  जाता हैl योग हमारे एंडोक्राइम  सिस्टम को Repair  करता है जैसा कि आप जानते हैं शरीर में होने वाली रासायनिक क्रियाओं के द्वारा ही भौतिक शरीर का ढांचा बनता है या बिगड़ता है वह रसायन ही पूर्ण रूप से जिम्मेदार माने जाते हैं  ऐसी अवस्था  या भविष्य के प्रति नेगेटिव सोच के कारण, निराशावादी प्रतिक्रि या रसायनों के संतुलन को बिगाड़ देती है शरीर के अंदर होने वाले परिवर्तन कोशिकाओं के निर्माण में बाधा उत्पन्न करती है  कोशिकाओं के निर्माण में रसायनों का महत्वपूर्ण योगदान होता है आशा व उम्मीद से भरा हुआ सोच शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने वाली होती है  Negative  निराशावादी सोच शारीरिक वृद्धि को प्रभावित करती है 

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