बेहद खतरनाक है एजुकेशन वार

बेहद खतरनाक है एजुकेशन वार         

एक बहुत बड़ा स्कैम है इस देश के अंदर क्योंकि इस एजुकेशन वार  से देश में हर घंटे में एक बच्चा डिप्रेशन व

तनाव का शिकार होकर मौत को गले लगा लेता है या अपने लाइफ से समझौता कर थक हारकर कोई छोटे-मोटे कार्य करने लग जाता है क्योंकि उसे दर-दर भटकने के  बावजूद भी नौकरी नसीब नहीं हो पाता है मां बाप के सपनों तले दबकर उसकी मानसिक मौत हो जाती है वह शरीर से तो समाज में रहता है मगर वास्तविक हालात उसके कुछ और हो जाते हैं वर्तमान म डिग्री पाने के लिएें लाखों करोड़ों रुपए खर्च करने पड़ते हैं I इतना पैसा खर्च करने के बावजूद भी  नौकरी की कोई गुंजाइश नहीं  हैे .अब हम आपको आचार्य चाणक्य की नीतियों की ओर ले चलते हे बात उस समय की है जब 360 इशा पूर्व भारत में एक विशाल मगध साम्राज्य हुआ करता था जिसका शासक क्रूर और निरंकुश राजा धनानंद के हाथों में था जब सिकंदर विशाल सेना लेकर पूरी उत्तरी भाग से तेजी से भारत के छोटे छोटे  राज्यों पर विश्व विजय पताका लहराते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा था, आचार्य चाणक्य को अपनी मातृभूमि  इस तरह एक विदेशी के हाथों गुलाम होना बेहद नागवार लग रहा था  आचार्य चाणक्य चाहते थे कि छोटे छोटे राज्यों को मिलाकर एक अखंड भारतीय सेना का निर्माण हो ताकि वह विशाल सेना, सिकंदर के विशाल सेना से लड़ ़ सके सभी राजाओं को यह संदेश  दिया गया  इस बीच एक सभा का भी आयोजन किया गया जिसमें अपना प्रस्ताव आचार्य चाणक्य ने सभी राजाओं के सामने रखा जिस पर काफी विचार-विमर्श हुआ लेकिन सभी राजाओं के आपसी मनमुटाव के चलते ,  आचार्य चाणक्य के विचारों को नकार दिया गया गया ,उस समय के सभी राजा आने वाले   खतरों से अनजान थे सिर्फ उस वक्त आचार्य ेचाणक्य के दिमाग में खतरे का आभास बिजली बनकर गिर रहे थे अंत में उन्होंने हार नहीं माना उनका मानना था कि, जब दुश्मन ताकतवर हो और हम उस से लड़कर जीत सकने में समर्थ ना हो तब उस समय बुद्धिमानी इसी में है कि दिमाग से लड़ा जाए सबसे पहले दुश्मन के आत्मबल को तोड़ा जाए उसके बाद दुश्मन के कैंप में सेंधमारी कर उसको अंदर से खोखला बना दिया जाए ,उसे मानसिक रूप से इतना डरा दिया जाए कि उसका आत्मबल हिल जाए ताकि वह कमजोर खिलाड़ी साबित हो क्योंकि आत्मबल से टूटा हुआ व्यक्ति ना तो स्वयं की कोई मदद कर पाता है  ना ही लोगों की किसी प्रकार की मदद कर पाता है ?यह कार्य उन्होंने उस वक्त किया था, सिकंदर कोभूत प्रेत का डर व विषैला पदार्थ देकर उसके आत्मबल को तोड़ने का प्रयास किया गया था , उनका मानना था कि जब राजा कमजोर पड़ जाता है तो उसकी सेना स्वयं कमजोर हो जाती है और कमजोर राजा आसानी से अपना युद्ध हार जाता है I अंत में सिकंदर को वापस अपने देश लौटना पड़ा था आचार्य चाणक्य की युक्तियां बेहद कारगर साबित हुई थी इस कहानी को समझाने का मेरा मकसद सिर्फ इतना ही है की मानसिक रूप से टूटे हुए लोग बिना युद्ध के ही हार जाते हैं आप सभी को 18 57 की क्रांति के इतिहास के बारे में जरूर पता होगा इस क्रांति ने अंग्रेजों को बुरी तरह से हिला कर रख दिया था देश में चारों तरफ आजादी की क्रांति का बिगुल बज रहा था उसके बाद अंग्रेजों ने इस देश के लोगों के ऊपर इतना सारा टैक्स लगा दिया की हर भारतवासी टैक्स भरते भरते कठिन हालातों में जीने लगे थे अंग्रेजों का एक ही मकसद था सभी भारतीयों कोआर्थिक रूप से कमजोर बनाना ताकि इनकी एकता कमजोर पड़ जाए  ,जब एकता नहीं होगा तोआज़ादी की बात सपने में भी नहीं सोचेंगे I  तब इसके ठीक बाद उन्होंने लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति को लागू किया था जिसका सिर्फ एक मकसद था मानसिक रूप से कमजोर बनाना ताकि लंबे समय तक आसानी से शासन किया जा सके भारतीयों को शिक्षित बनाकर उनका विकास करना उनका मकसद बिल्कुल नहीं था I

बेहद खतरनाक है एजुकेशन वार

कल. बलऔर छल तीनों का उन्होंने भरपूर उपयोग किया था जहां बल का उपयोग करना था वहां उन्होंने बलपूर्वक कुचल दिया जहां कल का उपयोग करना था वहां उन्होंने बुद्धिमत्ता पूर्वक कल का उपयोग किया ,मैकाले की शिक्षा प्रणाली उनकी प्रबंधन का बेहद सफल नमूना है तभी उन्होंने 90 सालों तक दोबारा शासन किया I इस देश को सोने की चिड़िया कहा जाता था मगर इनके युक्त पूर्वक लागू किए गए शिक्षा प्रणाली ने भारत के आजादी के 72 वर्षों के बाद भी भारतवासी यानी इस देश के आम नागरिक इस शिक्षा प्रणाली को आज
 भी झेल रहे हैं अगर भारत की संस्कृति को आज भी संसारमें सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है तो सिर्फ प्राचीन भारतीय संस्कृति के कारण जो संस्कृति लोगों के जीवन में तीज त्यौहार बन कर आज भी जीवित है
अंग्रेजों ने यहां के तीजत्योहारों को सिर्फ इसलिए नहीं बदल  पाए की यहां के लोगों के खून में रच बस चुके थे  संस्कृत से खिलवाड़ का मतलब था महा बगावत और ऐसी परिस्थितियां पैदा नहीं करना चाहते थे उनका मकसद था धन संपत्ति हासिल करना, शासन के माध्यम से संस्कृति खत्म नहीं करना चाहते थे आज उसी एजुकेशन वार का परिणाम है कि इस देश में करोड़ों अरबों का कोचिंग कारोबार खड़ा है भारत के हर माता- -पिता को ऊंचेसपने दिखा कर उनके बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर बनाने का सब्जबाग दिखाकर इस सपने को ऊंचे ऊंचे दामों में बेचकर भारी मुनाफा कमाया जा रहा है  मां बाप अपने खून पसीने की गाड़ीकमाई को बच्चों के भविष्य के खातिर न्योछावर कर रहे हैंे हैं ताकि उनका बच्चा पढ़ लिखकर एक अच्छी नौकरी पा सके , उसका जीवन सुखमय हो सके I

बेहद खतरनाक है एजुकेशन वार

जिस तरह से आचार्य चाणक्य ने आने वाले खतरे की दिशा को मोड़ दिया था ठीक उसी प्रकार अंग्रेजों ने 18  57 की लड़ाई यानी विद्रोह के बाद से आने वाले हर खतरे की दिशा को मोड़ने में कामयाब हुए थे आज वही एजुकेशन वार जो कभी अंग्रेजों ने हथियार के रूप में इस्तेमाल किया था देश के युवाओं पर इस्तेमाल किया जा रहा है देश में सबसे ज्यादा मौतें उसी एजुकेशन बार की वजह से हो रहे हैं इतना ही नहीं अप्रत्यक्ष एजुकेशन वार ने यहां के प्रतिभाशाली लोगों की मानवी शक्तियों को कुचलने का कार्य किया है दबे कुचले गरीब लोगों पर मनमर्जी व आसानी से शासन किया जा सके बिना खून खराबा की लड़ाई है जिसमें सामने वालों को पता भी नहीं चलता कि वार कब हुआ लेकिन उस छुपे हुए हथियार के जरिए ,वार हर वक्त लोगों के दिमाग पर किया जा रहा है एजुकेशन सिस्टम दो प्रकार के होते हैं हार्ड वर्क एजुकेशन सिस्टम दूसरा स्मार्ट वर्क एजुकेशन सिस्टम ,लार्ड मैकाले ने जानबूझकर हार्ड एजुकेशन सिस्टम लागू किया था ताकि,मिलो कारखानों व अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए भारी संख्या मेंHard work करने वाले मजदूरों की आपूर्ति किया जा सके अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ही Hard eduacation system लागू किया  ताकि आम के आम गुठलियों के दाम मिल जाए, एक तरफ भारतीयों  के मानसिक हालात को कमजोर बनाने का मकसद था तो दूसरी तरफ हार्ड वर्क करने लायक लोगों की आवश्यकता की पूर्ति ,आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि ब्रिटिश विश्वविद्यालय को विश्व के Top class के विश्वविद्यालयों मैंप्रथम स्थान पर रखा गया है भारती विश्वविद्यालय .स्कूल कॉलेजों को टॉप200 विश्वविद्यालयों में कोई  जगह नहीं मिल पाता  हैआप इस बात से अच्छी तरह  समझ सकते हैं एजुकेशन वार कितना तगड़ा है?

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